यादों की फरमाइश भी कमाल की होती है...
सजदा वही होता है जहाँ दिल हार जाता हैं



कभी रज़ामंदी तो कभी बग़ावत है इश्क
प्रेम राधा का, तो मीरा की भक्ति है इश्क 




झुकी हुई गर्दन से मोबाइल में अजनबी रिश्ते जुड़ सकते हैं...
तो हकीकत के रिश्तों में गर्दन झुका लेने में क्या हर्ज है ???




हर त्यौहार कुछ न कुछ बेचते नजर आते हैं……
कुछ बच्चों के "बड़े दिन" सिग्नल पे गुजर जाते हैं



यूँ तो ए ज़िन्दगी तेरे सफर से शिकायते बहुत थी, 
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारे बहुत थी !!



 अपने लबों से भी तो कभी आज़ाद कर ख्वाहिशें अपनी.
जरा मुझे भी तो मालूम हो मेरी तलब तुझे किस हद तक है



एक उम्र वो थी कि, जादू में भी यक़ीन था
एक उम्र ये है कि, हक़ीक़त पर भी शक़ है

 

कुछ आता है खुद चलकर, कुछ तक चल जाना होता है 
मिलता वही है जो लिखा है, बाक़ी सब बहाना होता है



*मत बनाओ मुझे फुर्सत के लम्हों का खिलोना,*
*मैं भी इंसान हूँ, दर्द मुझे भी होता है..!!

 

चार आने…साँस☺️
बारह आने … तेरा एहसास
बस यही हैं एक रूपया जिदंगी…
  









*न सब बेखबर हैं, न होशियार सब,*
*ग़रज़ के मुताबिक हैं, किरदार सब….*



जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुलाकर,
कुछ शायरी सुनाऊँ मैं तुझे पास बिठाकर .!!! 




रहने दे मुझे यूँ उलझा हुआ सा तुझमें,
सुना है सुलझ जाने से धागे अलग अलग हो जाते हैं..!!💞




कोई तो हाल ए दिल अपना भी समझेगा
हर शख्स को नफरत हो जरूरी तो नहीं

 

काश ये इश्क भी चुनावों की तरह होता.......
हारने के बाद विपक्ष में बैठकर कम से कम दिल
खोलकर
बहस तो कर लेते... 
 





 कर दी मैंने नमाज अदा इनके सामने भी...
मुझे सिखाया गया था कि खुदा एक हैं....




" नज़र अंदाज़ करते है वो..
मतलब हम नज़र में तो है..."




मोहब्बत करने वालों की कमी नहीं दुनियां में.....
अकाल तो....
निभाने वालों का पड़ा हुआ है...




तुम नहीं होते हो,
बहुत खलता है....
इश्क़ कितना है तुमसे..
पता चलता है......!!




कुछ भी हो मैं तो इल्जाम तुम्हें ही दूंगा
तुम मासूम तो बहुत हो मगर तोबा तुम्हारी आंखें..




मेरी आंखों के आंसू कह रहे मुझसे अब दर्द इतना है कि सहा नहीं जाता*
       *न रोक पलको से खुल कर छलकने दे अब यूं इन आंखों में रहा नहीं जाता !!*





बैठे बैठे फेंक दिया है आतिश-दान में क्या क्या कुछ ,
        मौसम इतना सर्द नहीं था जितनी आग जला ली है ।💔😐